भारत का भविष्य उसकी युवा शक्ति के हाथों में है। मुझे पूर्ण विश्वास है कि भारत का Gen Z केवल भावनाओं से नहीं, बल्कि विवेक, तथ्यों और राष्ट्रीय उत्तरदायित्व की भावना से निर्णय लेने की क्षमता रखता है।
भारत का इतिहास इस बात का साक्षी है कि जब भी राष्ट्र किसी चुनौती के दौर से गुज़रा है—चाहे वह कोविड महामारी हो, सीमाओं पर सुरक्षा की चुनौती हो या कोई अन्य राष्ट्रीय संकट—हमारे युवाओं, सैनिकों, डॉक्टरों, वैज्ञानिकों और नागरिकों ने अद्भुत साहस, अनुशासन और राष्ट्रनिष्ठा का परिचय दिया है। यही भारत की वास्तविक पहचान है।
लोकतंत्र में मतभेद स्वाभाविक हैं और असहमति भी लोकतांत्रिक व्यवस्था का अभिन्न अंग है। किंतु लोकतांत्रिक अधिकारों और राष्ट्रहित के बीच संतुलन बनाए रखना भी उतना ही आवश्यक है। किसी भी विचार, आंदोलन या अभियान का मूल्यांकन तथ्यों, संवैधानिक मूल्यों और राष्ट्रीय हित की कसौटी पर होना चाहिए, न कि केवल भावनात्मक या वैचारिक आग्रह के आधार पर।
यदि किसी संगठन, संस्था या समूह पर विदेशी प्रभाव, अपारदर्शी वित्तपोषण या भारत के लोकतांत्रिक एवं सामाजिक ढाँचे को प्रभावित करने जैसे आरोप हैं, तो उनकी निष्पक्ष, पारदर्शी और विधिसम्मत जांच होनी चाहिए। किसी भी लोकतंत्र की शक्ति कानून के शासन और सत्य पर आधारित निष्कर्षों में निहित होती है।
भारत की सबसे बड़ी पूँजी उसकी युवा चेतना है। इसलिए मेरा विनम्र आग्रह है कि हमारा Gen Z सूचना के इस युग में सत्य और दुष्प्रचार के बीच अंतर करना सीखे, आलोचनात्मक चिंतन को अपनाए, और किसी भी वैचारिक ध्रुवीकरण का उपकरण बनने के बजाय राष्ट्र निर्माण का सहभागी बने।
आइए, हम सब मिलकर एक ऐसे भारत के निर्माण का संकल्प लें जहाँ राष्ट्रीय एकता, लोकतांत्रिक मूल्यों, सांस्कृतिक विरासत और संवैधानिक दायित्वों का सम्मान सर्वोपरि हो।
राष्ट्र प्रथम। संविधान सर्वोपरि। भारत सर्वोपरि।
जय हिन्द। जय भारत।
No comments:
Post a Comment