आज भारत केवल एक विकासशील देश नहीं, बल्कि दुनिया की एक उभरती हुई आर्थिक और रणनीतिक शक्ति बन चुका है। इतिहास गवाह है कि जब भी कोई देश तेज़ी से आगे बढ़ता है, तो कुछ देशों को यह पसंद नहीं आता। इसलिए भारत में होने वाले बड़े राजनीतिक आंदोलनों को केवल घरेलू राजनीति के नजरिए से नहीं, बल्कि वैश्विक राजनीति के संदर्भ में भी देखना चाहिए।
यह एक स्थापित तथ्य है कि दुनिया के कई शक्तिशाली देश समय-समय पर दूसरे देशों की राजनीति और नीतियों को प्रभावित करने की कोशिश करते रहे हैं। इसलिए यदि भारत में किसी भी प्रकार के विदेशी हस्तक्षेप के आरोप लगते हैं, तो उनकी निष्पक्ष और गहन जांच संबंधित संवैधानिक संस्थाओं द्वारा होनी चाहिए।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की अंतरराष्ट्रीय पहचान पहले की तुलना में काफी मजबूत हुई है। जी-20 की अध्यक्षता, भारत की बढ़ती अर्थव्यवस्था, डिजिटल क्रांति, मजबूत विदेश नीति और वैश्विक मंचों पर भारत की बढ़ती भूमिका ने देश का सम्मान बढ़ाया है।
मेरी राय में मोदी सरकार ने नई शिक्षा नीति (NEP), महिला आरक्षण कानून, डिजिटल इंडिया, यूपीआई, और विदेशी चंदे (FCRA) से जुड़े कड़े नियम जैसे कई बड़े सुधार इसलिए किए ताकि देश की संस्थाएं मजबूत हों, भ्रष्टाचार कम हो और भारत अधिक आत्मनिर्भर और सुरक्षित बने।
मेरे अनुसार नरेंद्र मोदी की राजनीति केवल चुनाव जीतने तक सीमित नहीं है। उनकी कार्यशैली यह दिखाती है कि पहले मजबूत जनसमर्थन और संसदीय ताकत हासिल करो, फिर बड़े और लंबे समय तक असर डालने वाले फैसले लागू करो। उनका ध्यान तात्कालिक राजनीति से अधिक स्थायी बदलाव पर दिखाई देता है।
इतिहास बताता है कि कई देश युद्ध से नहीं, बल्कि अंदरूनी मतभेदों और बाहरी शक्तियों द्वारा उन मतभेदों का फायदा उठाने के कारण कमजोर हुए। इसलिए राष्ट्रीय एकता, मजबूत लोकतांत्रिक संस्थाएं और देशहित हमेशा सर्वोपरि होने चाहिए।
लोकतंत्र में मजबूत विपक्ष होना जरूरी है। सरकार की आलोचना होनी चाहिए, नीतियों पर सवाल उठने चाहिए और जवाबदेही तय होनी चाहिए। लेकिन राजनीतिक मतभेद कभी भी देश की एकता, सुरक्षा और राष्ट्रीय हित से ऊपर नहीं होने चाहिए।
मेरे विचार से देशभक्ति किसी एक राजनीतिक दल की नहीं, बल्कि हर भारतीय की जिम्मेदारी है। सरकारें चुनाव से बदलती रहती हैं, लेकिन राष्ट्र हमेशा सर्वोपरि रहता है। यदि हम भारत को विश्व की अग्रणी शक्ति बनाना चाहते हैं, तो राजनीति से ऊपर उठकर राष्ट्रहित को सबसे पहले रखना होगा।
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